Monday, March 23, 2020

“हमें क्या पड़ी है !”

           “ हमें क्या पड़ी है !”

देख कर आज की राजनीति का रंग !
चाणक्य भी नि:संदेह रह जाएगा दंग !!
जनमत का घोर अपमान,धोखाधड़ी है !
संकटकाल है ,जन-जागृति की घड़ी है!!

“जनता हर नेता और सरकार से बड़ी है!”
यहाँ अर्द्ध-सत्य ,झूठे जुमलों की झड़ी है!!
भोली, ठगी-सी जनता मुँह बाए खड़ी  है !
कुछ मूर्खों का नारा है-“हमें क्या पड़ी है !!”

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