तूं भी तै शामिल सै
भारत माँ के पूत लाडले क्यूं हो रह्या गाफिल सै ।
जिन्दगी के इस सफ़र में तूं भी तै शामिल सै ।
जो मेहनत तै काम करैं तै मिट ज्या घोर उदासी ।
पड़ती धरती सोना उगलै आमदनी हो खासी ।
निर्धन-दलित जनां की फौरन कटै कर्ज की फांसी ।
भई शोषक-साहूकार रहै ना सामंती सत्यानासी ।
इस देस के बच्चे बच्चे नै, जीवण का हक हासिल सै ।1।
भारत माता की प्रतिष्ठा जग मैं सभ तैं उंच्ची सै ।
जाति-पाति के झगड़े आली राजनीति टुच्ची सै ।
आपस के झूठे झगड़यां नै भई जड़ म्हारी काटी सै ।
सभ भारतवासी बणे बराबर भारत की माटी तै ।
अमर शहीदों की जै बोलो दूर नहीं मंज़िल सै ।2।
बलिदानां मैं तपता आया भारता का पाणी सै ।
हर बच्चा प्रताप-शिवा, हर नारी क्षत्राणी सै ।
मिलैं मुहम्मद-शंकर-ईसा-महबीर के हाणी सै ।
नानक-सूर-कबीर और मीरा तुलसी-बुद्ध की वाणी सै ।
मानव-प्रेम अमर भई साधो, क्यूं हो रह्या संगदिल सै ।3।
बढो जवानो, उठो किसानों, देखैगा संसार ।
भेद भाव नै भूल कै सारे जग मैं बांटो प्यार ।
शक्तिशाली देश रहै तो पूजैगा सन्सार।
प्रेम -प्रगति सुखमय जीवन के सच्चे आधार ।
बलबीरसिंह भई समझणियां नै नया लुतफ हासिल सै ।
बलबीर