चाटुकार। - वाक्प्रवीण
चाटुकार कहो या चमचा ,
मिनियन कहो या मस्केबाज ।
दीमक लगे पेड़ की नाईं,
ग्रसित इन से पूर्ण समाज ।।
कर्मठता का ढोंग रचा कर,
दान्त निपोरें बारम्बार ।
श्वान सरीखे तलवे चाटें,
और आड़ में करें शिकार ।।
स्वार्थ का मिष्ठान चाटकर,
कुटिल जीव गुर्राते हैं !
रीढ़हीन ,निर्लज्ज, निष्करुण,
सर्पिल पथ अपनाते हैं।
जब अहंकार से फूला स्वामी ,
निज विवेक - चिन्तन से हीन ।
ऐसे में उन की बन आती,
जो चाटुकार , वाक्प्रवीण ।।
balbir4u.blogspot.com
चाटुकार कहो या चमचा ,
मिनियन कहो या मस्केबाज ।
दीमक लगे पेड़ की नाईं,
ग्रसित इन से पूर्ण समाज ।।
कर्मठता का ढोंग रचा कर,
दान्त निपोरें बारम्बार ।
श्वान सरीखे तलवे चाटें,
और आड़ में करें शिकार ।।
स्वार्थ का मिष्ठान चाटकर,
कुटिल जीव गुर्राते हैं !
रीढ़हीन ,निर्लज्ज, निष्करुण,
सर्पिल पथ अपनाते हैं।
जब अहंकार से फूला स्वामी ,
निज विवेक - चिन्तन से हीन ।
ऐसे में उन की बन आती,
जो चाटुकार , वाक्प्रवीण ।।
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