Wednesday, May 27, 2020

SATYAM BRUYAT - Justice Katju : Sanskrit As A Language Of Science

SATYAM BRUYAT - Justice Katju : Sanskrit As A Language Of Science: Sanskrit As A Language Of Science By : Justice Markandey Katju, Judge, Supreme Court of India Speech delivered on 13.10.2009 in the Ind...

Monday, March 23, 2020

“हमें क्या पड़ी है !”

           “ हमें क्या पड़ी है !”

देख कर आज की राजनीति का रंग !
चाणक्य भी नि:संदेह रह जाएगा दंग !!
जनमत का घोर अपमान,धोखाधड़ी है !
संकटकाल है ,जन-जागृति की घड़ी है!!

“जनता हर नेता और सरकार से बड़ी है!”
यहाँ अर्द्ध-सत्य ,झूठे जुमलों की झड़ी है!!
भोली, ठगी-सी जनता मुँह बाए खड़ी  है !
कुछ मूर्खों का नारा है-“हमें क्या पड़ी है !!”

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Tuesday, January 14, 2020

चाटुकार - वाक्प्रवीण !

    चाटुकार।   -   वाक्प्रवीण

चाटुकार कहो या चमचा ,
मिनियन कहो या मस्केबाज ।
दीमक लगे पेड़ की नाईं,
ग्रसित इन से पूर्ण समाज ।।

       कर्मठता का ढोंग रचा कर,
       दान्त निपोरें  बारम्बार  ।
        श्वान सरीखे तलवे चाटें,
        और आड़ में करें शिकार ।।

स्वार्थ का मिष्ठान चाटकर,
कुटिल जीव गुर्राते हैं !
रीढ़हीन ,निर्लज्ज,  निष्करुण,
सर्पिल पथ अपनाते हैं।

      जब अहंकार से फूला स्वामी ,
       निज विवेक - चिन्तन से हीन ।
       ऐसे में उन की बन आती,
        जो चाटुकार ,  वाक्प्रवीण  ।।

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Sunday, January 5, 2020

कर्म के काँटे रुके न उगने

                कर्म के काँटे रुके न उगने

कभी कभी एकान्त क्षणों में ,
यादें अंगड़ाई लेती हैं ।
जिन गलियों से मैं गुजरा हूँ ,
मौन बुलावा वे देती हैं ।  १

        वह सपनों का नीड़ निराला,
         शायद अब आबाद नहीं है ।
         या पुष्पों-सी प्यारी बस्ती,
         पतझड़ के उस पार कहीं है । २

डेरा अपना रैनबसेरा,
सुबह हुई चल चुग्गा चुगने,
इसी क्रम में जीवन बीता,
कर्म के काँटे रुके न उगने ! ३

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