मुक्तक
भिखारी हैं अनेकों जन, जो दर-दर भटकते हैं ।
खु़दी को दफन कर अपनी,बस फरियाद करते हैं ।।
सुखं जो भीख में मिलता , तो सारा जग सुखी होता ।
ज़िन्दगी जश्न बन जाती ,न कोई भी दुखी होता ।।
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जब पूर्वाग्रह-अन्धभक्ति के,
हर तरफ नगाड़े बजते हैं ।
धर्म और श्रद्धा की आड़ में,
पाखण्ड अखाड़े सजते हैं ।।
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आदि गुरू श्री नानक देव ने,
जग को राह दिखाई है ।
‘इक नूर ते सब जग उपज्या’,
मानव सब भाई-भाई हैं ।।
प्यार- मुहब्बत -भाईचारा ,
जग में सब से बड़ा सहारा ।
आपस में हम हों विश्वासी ,
यही सिखाते क़ाबा-काशी।।
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भिखारी हैं अनेकों जन, जो दर-दर भटकते हैं ।
खु़दी को दफन कर अपनी,बस फरियाद करते हैं ।।
सुखं जो भीख में मिलता , तो सारा जग सुखी होता ।
ज़िन्दगी जश्न बन जाती ,न कोई भी दुखी होता ।।
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जब पूर्वाग्रह-अन्धभक्ति के,
हर तरफ नगाड़े बजते हैं ।
धर्म और श्रद्धा की आड़ में,
पाखण्ड अखाड़े सजते हैं ।।
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आदि गुरू श्री नानक देव ने,
जग को राह दिखाई है ।
‘इक नूर ते सब जग उपज्या’,
मानव सब भाई-भाई हैं ।।
प्यार- मुहब्बत -भाईचारा ,
जग में सब से बड़ा सहारा ।
आपस में हम हों विश्वासी ,
यही सिखाते क़ाबा-काशी।।
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