सरस्वती -वन्दना
श्वेत पद्म राजिता, देवी वीणा पाणिनी ।
शुचि शुभ्रा, ज्ञान-गंगा लोक-मंगल-कारिणी ।
श्वेताम्बरधरा नित्या, श्वेतालंकार भूषिता ।
वन्दिता, सुस्मिता, देव-मानव – अर्चिता ।
श्वेत हंस वाहिनी,नीर-क्षीर विवेकनी,
सहज वरदायिनी, उच्च भाव-भाविनी ।
सर्व कला धारिणी ,सुस्मिता-शालिनी,
नमस्तुभ्यम् ,विश्व-वन्द्या,मां, मनीषा-मानिनी !
श्वेत पुष्प शोभिता, पूजिता सदा ।
ज्योतिर्मयी सरस्वती सत्य – विद्या ।
तमहर प्रकाशकर माँ! हमें सुपथ दिखा ।
जय जय माँ सरस्वती, जय जय जया ।
बलबीर
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