सत्ता-पक्ष और विपक्ष,
हैं ठग-विद्या में दोनों दक्ष ।
इन दोनों का एक है लक्ष्य,
जन-धन ही है इन का भक्ष्य !!
………………………………
इक नागनाथ ,इक सांपनाथ,संग में चुस्त सपोले ,
पर चूहा-चूजा-चिड़ी-कबूतर सब हैं कितने भोले !
………………………………………………
नेताओं की नीयत खोटी और धन्धे हैं काले ।
रोटी-कुटी-लँगोटी जन की पड़े हुए हैं लाले !!
……………………………………… ……
नेता घड़ियाली आँसू बहाएं दुखी-जनों को देख कर ।
फिर चूल्हा बुझा देते हैं उनका अपनी रोटी सेंक कर ।।
………………………………………………
नेताओं के नाटकीय छल जनता को मोहते हैं ।
भोली जनता को ये नेता पटक-पटक धोते हैं ।।
हैं ठग-विद्या में दोनों दक्ष ।
इन दोनों का एक है लक्ष्य,
जन-धन ही है इन का भक्ष्य !!
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इक नागनाथ ,इक सांपनाथ,संग में चुस्त सपोले ,
पर चूहा-चूजा-चिड़ी-कबूतर सब हैं कितने भोले !
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नेताओं की नीयत खोटी और धन्धे हैं काले ।
रोटी-कुटी-लँगोटी जन की पड़े हुए हैं लाले !!
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नेता घड़ियाली आँसू बहाएं दुखी-जनों को देख कर ।
फिर चूल्हा बुझा देते हैं उनका अपनी रोटी सेंक कर ।।
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नेताओं के नाटकीय छल जनता को मोहते हैं ।
भोली जनता को ये नेता पटक-पटक धोते हैं ।।
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