Saturday, November 9, 2019

अभिवादन……

                               अभिवादन
प्यारभरा अभिवादन,
सुवासित करता है ,
अपना और अपनों का मन !
आत्मीयता ही तो है,
आत्म-विस्तार , आत्मानुभूति ,
आत्मशुद्धि का अनुपम साधन !
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जब कभी बेखुदी में खुदा का नूर नजर आता है ,
तभी गुनाहों की कीचड़ से इनसान उबर पाता है ।
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कलियाँ चटकती हैं ,फूल मुसकुराते हैं ।
खुश्बू और मस्ती की बारात सजाते हैं ।
पर डाली से तोड़ने पर लुटे-पिटे- निरीह,
बेबस कश्मीरी पण्डित नजर आते हैं ।।
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 नफरतों के जंगल में अंधेरा बहुत है ।
कोई रोशनी दिखा दे ऐ मेरे खुदा !

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